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संविधान भारत के लोगों के लिए सर्वोच्च शासी दस्तावेज है : अपर पुलिस अधीक्षक

  संविधान दिवस पर जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया संवाददाता - बागी न्यूज 24   आजमगढ़। केन्द्रीय संचार ब्यूरो, सूचना और प्रसारण मंत्र...

 

संविधान दिवस पर जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया

संवाददाता - बागी न्यूज 24  

आजमगढ़। केन्द्रीय संचार ब्यूरो, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, आजमगढ़ द्वारा जनपद के बेलईसा में स्थित चिल्ड्रेन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में "संविधान दिवस" पर एक जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आजमगढ़ के अपर पुलिस अधीक्षक चिराग़ जैन  ने कहा कि संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में संविधान दिवस मनाया जाता है। संविधान भारत के लोगों के लिए सर्वोच्च शासी दस्तावेज है, इसलिए यह बहुत महत्व रखता है। इसके अलावा संविधान दिवस मनाकर, लोगों और बच्चों को न केवल संविधान के महत्व का एहसास होता है, बल्कि बी. आर. अंबेडकर के साथ अन्य संविधान निर्माता को भी याद करने का मौका मिलता हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश का संविधान विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान है। जनपद न्यायालय आजमगढ़  के वरिष्ठ डिफेंस काउंसिल आशीष कुमार राय  ने कहा कि संविधान दिवस पर हमें अपने अंदर ज्ञान का दीपक प्रज्जवलित करने की आवश्यकता है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को हमारे देश के संविधान के महत्व को समझ सके, जिससे कि वह इसका सम्मान तथा पालन करें। इसके साथ ही यह हमें वर्तमान से जोड़ने का कार्य करता है, जब लोग जनतंत्र का महत्व दिन-प्रतिदिन भूलते जा रहे है, यही वह तरीका जिसे अपनाकर हम अपने देश के संविधान निर्माताओं को सच्ची श्रद्धांजली प्रदान कर सकते है और लोगो में उनके विचारों का प्रचार-प्रसार कर सकते है।   कार्यक्रम को संबोधित करती हुई विद्यालय की प्रधानाचार्या सपना सिंह ने कहा कि आजादी के पहले तक भारत में रियासतों के अपने अलग-अलग नियम कानून थे, जिन्हें देश के राजनीतिक नियम, कानून और प्रक्रिया के अंतर्गत लाने की आवश्यकता थी। इसके अलावा हमारे देश को एक ऐसे संविधान की आवश्कता थी। जिसमें देश में रहने वाले लोगों के मूल अधिकार, कर्तव्यों को निर्धारित किया गया हो, ताकि हमारा देश तेजी से तरक्की कर सके और नयी ऊंचाइयों को प्राप्त कर सके। भारत की संविधान सभा ने 26 जनवरी 1949 को भारत के संविधान को अपनाया और इसके प्रभावीकरण की शुरुआत 26 जनवरी 1950 से हुई। विद्यालय के सहायक प्रबंधक एस पी शुक्ला ने बताया कि डॉ0 बी0 आर0 अम्बेडकर को भारतीय संविधान के पिता के रूप में जाना जाता है, क्योंकि वे मसौदा समिति के अध्यक्ष थे संविधान के प्रवर्तन के लिए 26 जनवरी का महत्व यह है कि यह "पूर्ण स्वराज दिवस"(26 जनवरी 1930) की सालगिरह थी; जिस दिन भारतीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और पहली बार भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी एवं कार्यक्रम के नोडल अधिकारी तारिक अज़ीज़ ने बताया कि यह संविधान ही है, जो हमें एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है। जहां संविधान के दिए मौलिक अधिकार हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैं, वहीं इसमें दिए मौलिक कर्तव्य हमें हमारी जिम्मेदारियां भी याद दिलाते हैं। इससे क्षेत्र की जनता को संवैधानिक मूल्यों को समझने में सहायता होगी। कार्यक्रम के दौरान आयोजित गोष्ठी में विद्यालय के विद्यार्थियों के मध्य प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमें विजेता 20 प्रतिभागियों को विभाग की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में केंद्रीय संचार ब्यूरो, लखनऊ के पंजीकृत दल धोबिया लोकनृत्य पार्टी आजमगढ़ द्वारा  लोकनृत्य के माध्यम से विषयगत उद्देश्यों को सरलता पूर्वक प्रस्तुत किया गया। आमजन को "संविधान दिवस" के बारे में जागरूकता संदेश देने के लिए शहर में प्रचार वाहन भी चलाया गया। प्रचार वाहन को शहर के नरौली तिराहे से क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी तारिक अजीज द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर तकनीकी सहायक रामखेलावन, जय प्रकाश, धर्मेन्द्र श्रीवास्तव, ज्ञानेंद्र चतुर्वेदी, अनुराग यादव आदि अन्य लोग मौजूद रहे।



 

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