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पीड़िता ने लगाई पुलिस से न्याय की गुहार

  पत्नी पर जुल्म पति-देवर बना हैवान ! मासूम बच्चों के सामने मां की पिटाई, पुलिस में नहीं हो रही है सुनवाई सवाददाता - बागी न्यूज 24   आजमगढ़ ...

 

पत्नी पर जुल्म पति-देवर बना हैवान ! मासूम बच्चों के सामने मां की पिटाई, पुलिस में नहीं हो रही है सुनवाई

सवाददाता - बागी न्यूज 24  

आजमगढ़  बिलरियागंज, यहां एक बेबस महिला की चीखें न सिर्फ उसके घर की चारदीवारी में कैद रह गईं, बल्कि थाना परिसर तक पहुंचने के बाद भी न्याय के दरवाजे बंद ही रहे। पीड़िता तबस्सुम पत्नी एहसान का आरोप है कि 22 अप्रैल 2026 की शाम करीब 5 बजे उसके पति एहसान, देवर हन्नान, फैजान, सुफियान और अस्कान पुत्र इरफान ने उसके घर पर धावा बोल दिया। आरोप है कि इन लोगों ने आते ही गंदी-गंदी गालियां दीं, फिर महिला और उसके मासूम बच्चों पर टूट पड़े। तबस्सुम का कहना है कि उसके साथ न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उसकी इज्जत पर भी हाथ डालने की कोशिश की गई। देवर सुफियान और हन्नान ने कथित रूप से उसके कपड़े तक फाड़ दिए। यही नहीं, उसकी बड़ी बेटी को भी बुरी तरह लात-घूंसों से पीटा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब पीड़िता न्याय की आस लेकर थाना बिलरियागंज पहुंची, तो वहां से उसे सिर्फ निराशा ही हाथ लगी। न कोई एफआईआर दर्ज हुई, न ही किसी प्रकार की कार्रवाई। सवाल उठता है — क्या पुलिस का काम पीड़ितों को ठुकराना रह गया है? पीड़िता ने यह भी बताया कि उसका पति चार शादियां कर चुका है और उसे व उसके पांच बच्चों को न तो कोई खर्च देता है, न ही कोई सहारा। उल्टा परिवार के लोग उसे घर से भगाने के लिए लगातार अत्याचार कर रहे हैं। जिस मकान में वह रह रही है, वह भी उसके ससुर द्वारा दिया गया है, बावजूद इसके दबंग देवर आए दिन वहां पहुंचकर मारपीट और उत्पीड़न करते हैं। रोते-बिलखते हुए तबस्सुम ने उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया है “क्या महिला सशक्तिकरण का यही मतलब है? क्या एक महिला होने की सजा हमें इस तरह भुगतनी पड़ेगी?” यह घटना सिर्फ एक महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की नाकामी का आईना है, जो कागजों पर महिलाओं को सशक्त बनाने के दावे करता है। जब थाने में ही न्याय की हत्या हो जाए, तो आखिर पीड़ित जाए तो जाए कहां? क्या “महिला सुरक्षा” सिर्फ भाषणों तक सीमित रह जाएगी?अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल बनकर खड़ा होगा।









  



   

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