ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर एमएलसी ने उठाए गंभीर सवाल, कहा "विभाग की स्थिति अत्यंत दयनीय" संवाददाता - बागी न्यूज 24 आजमगढ़ ...
ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर एमएलसी ने उठाए गंभीर सवाल, कहा "विभाग की स्थिति अत्यंत दयनीय"
संवाददाता - बागी न्यूज 24
आजमगढ़ l उत्तर प्रदेश विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान सपा सदस्य (एमएलसी) शाह आलम "गुड्डू जमाली" ने नियम 105 के तहत बिजली विभाग की लचर व्यवस्था, किसानों की समस्याओं और बुनकरों पर पड़े बोझ को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री की क्षमता पर भरोसा जताते हुए विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर तीखा प्रहार किया।
गुड्डू जमाली ने सदन में अपने संबोधन के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए : गुड्डू जमाली ने कहा कि बिजली प्रदेश की "लाइफलाइन" है, लेकिन आज विभाग की स्थिति बेहद दयनीय है। अघोषित बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और ओवरलोडिंग से आम जनता त्रस्त है। उन्होंने विशेष रूप से किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सिंचाई के समय बिजली नहीं मिलती और अक्सर रात में बिजली दी जाती है, जिससे किसानों को जान का खतरा रहता है। मजबूरी में किसानों को महंगे डीजल का उपयोग करना पड़ रहा है। स्मार्ट मीटर को लेकर उन्होंने सरकार से हाई लेवल टेक्निकल ऑडिट की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 10,000 शिकायतें पेंडिंग हैं और 50% से ज्यादा उपभोक्ता स्मार्ट मीटर की बिलिंग से असंतुष्ट हैं। यह एक गंभीर विषय है जिसकी जाँच होनी चाहिए। सपा एमएलसी ने बुनकर समाज की आवाज उठाते हुए कहा कि स्व०नेताजी मुलायम सिंह यादव ने 2006 में बुनकरों को राहत देने के लिए 74 रुपये फ्लैट रेट की सुविधा दी थी, जो मार्च 2023 तक जारी रही। लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे बढ़ाकर 430 रुपये कर दिया है, जिससे गरीब बुनकर समाज की कमर टूट गई है। उन्होंने सरकार से इसे सहानुभूतिपूर्वक देखने का अनुरोध किया l विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का उदाहरण देते हुए गुड्डू जमाली ने आजमगढ़ के हरैया ब्लॉक के रौनपार उपकेंद्र अंतर्गत ग्राम "देवारा खास राजा शिवलोचन का पूरा" का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वहां 2018-19 में बिना खंभा और तार लगाए ही 12 घरों में जबरन मीटर लगा दिए गए। आज तक वहां बिजली नहीं पहुंची, लेकिन बिल भेजा जा रहा है और उपभोक्ताओं का शोषण हो रहा है। उन्होंने विभाग में निचले स्तर पर आउटसोर्सिंग के जरिए रखे गए कर्मचारियों के वेतन (मात्र 9,600 रुपये) को नाकाफी बताया। उन्होंने कहा कि इतनी कम तनख्वाह में गुजारा मुश्किल है, जो कहीं न कहीं भ्रष्टाचार को जन्म देता है। मत्स्य पालन और अन्य शुल्क में वृद्धि: गुड्डू जमाली ने मत्स्य पालन करने वाले किसानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पहले इसे घरेलू नलकूप की श्रेणी में रखा जाता था, लेकिन अब अधिकारियों द्वारा दबाव बनाकर इसे कमर्शियल श्रेणी में डाला जा रहा है, जिससे उनका बिल 2 रुपये से बढ़कर 8.40 रुपये प्रति यूनिट तक पहुँच गया है। इसके अलावा घरेलू कनेक्शन और नलकूप की लागत भी 3 से 4 गुना बढ़ा दी गई है। शाह आलम गुड्डू जमाली ने अंत में सभापति के माध्यम से मांग की कि यह एक लोक महत्व का विषय है, जिस पर सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा कराई जानी चाहिए और सरकार को इन समस्याओं का तत्काल समाधान करना चाहिए।
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