संवाददाता - बागी न्यूज 24 आजमगढ़। बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के जिला इकाई के तत्वावधान में सात सूत्रीय मांगों को लेकर नगर के रिक्शा स्टै...
संवाददाता - बागी न्यूज 24
आजमगढ़। बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के जिला इकाई के तत्वावधान में सात सूत्रीय मांगों को लेकर नगर के रिक्शा स्टैण्ड पर धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में रिक्शा स्टैंड से होते हुए कलेक्ट्रेट के बार रैली की शकल में प्रदर्शन किया गया। जहां प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रपति को सम्बोधित मांग पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया।
सौंपे गये मांग पत्र में जिलाध्यक्ष त्रिभुवन बौद्ध ने बताया कि महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 को बौद्धों ने नहीं बनाया इसलिए महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 को रद करके इसकी जगह नया एक्ट बनाया जाए। जिसमे सभी सदस्य बौद्ध होने चाहिए। महाबोधि महाविहार यह बौद्धों की विश्व धरोहर है ऐसे में महाविहार परिसर में अन्य किसी भी धार्मिक स्थापना अनुचित है दीवार पर पांडवों का जिक्र करना अपमान है।
प्रदेश संयोजक सुबाष चन्द्र बोद्ध ने कहाकि महाबोधि महाविहार मूलत बौद्धों की विश्व धरोहर है ऐसे में इस स्थल को बौद्धों का सुपुर्द किया जाए। साथ ही महंत के कोठी के सैकड़ों बुद्ध की प्रतिमाए, शिलालेख और अभिलेख पड़े है, उसे एएसआई बोधगया संग्रहालय को सुर्पुद किया जाना चाहिए। इसके अलावा महाबोधि महाविहार के आस-पास के परिसर में विधर्मी बड़े पैमाने पर लाउड स्पीकर लगाने से माहौल खराब हो रहा है, जिसका संज्ञान लेना चाहिए। महाबोधि महाविहार के पास सम्राट अशोक का महल था, जिसे फ्रांसीस बुकानन ने देखा था उसे ढूंढकर बोधगया का इतिहास उजागर किया जाए। इसके अलावा उन्होंने ईवीएम प्रणाली पर सवाल करते हुए चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की।
इसके अलावा बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क ने चेतावनी दिया कि अगर शीध्र ही सात बिन्दुओं पर कार्य नहीं किया गया तो संगठन पांच चरणों में चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में सुबाष चन्द्र बौद्ध, रामदवर, जयबहादुर मौर्य, अभिमन्यु प्रधान, विरेन्द्र प्रधान, दीपांकर कुमार, पंकज कुमार, रामविनय पटेल, राजकुमार शाक्य, रामविजय, एड मन्टू कुशवाहा एडवोकेट, विजय बहादुर यादव, बृजभूषण, रामनारायन, भगवती यादव, लालमन आदि मौजूद रहे।
आजमगढ़। बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क के जिला इकाई के तत्वावधान में सात सूत्रीय मांगों को लेकर नगर के रिक्शा स्टैण्ड पर धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में रिक्शा स्टैंड से होते हुए कलेक्ट्रेट के बार रैली की शकल में प्रदर्शन किया गया। जहां प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रपति को सम्बोधित मांग पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया।
सौंपे गये मांग पत्र में जिलाध्यक्ष त्रिभुवन बौद्ध ने बताया कि महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 को बौद्धों ने नहीं बनाया इसलिए महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 को रद करके इसकी जगह नया एक्ट बनाया जाए। जिसमे सभी सदस्य बौद्ध होने चाहिए। महाबोधि महाविहार यह बौद्धों की विश्व धरोहर है ऐसे में महाविहार परिसर में अन्य किसी भी धार्मिक स्थापना अनुचित है दीवार पर पांडवों का जिक्र करना अपमान है।
प्रदेश संयोजक सुबाष चन्द्र बोद्ध ने कहाकि महाबोधि महाविहार मूलत बौद्धों की विश्व धरोहर है ऐसे में इस स्थल को बौद्धों का सुपुर्द किया जाए। साथ ही महंत के कोठी के सैकड़ों बुद्ध की प्रतिमाए, शिलालेख और अभिलेख पड़े है, उसे एएसआई बोधगया संग्रहालय को सुर्पुद किया जाना चाहिए। इसके अलावा महाबोधि महाविहार के आस-पास के परिसर में विधर्मी बड़े पैमाने पर लाउड स्पीकर लगाने से माहौल खराब हो रहा है, जिसका संज्ञान लेना चाहिए। महाबोधि महाविहार के पास सम्राट अशोक का महल था, जिसे फ्रांसीस बुकानन ने देखा था उसे ढूंढकर बोधगया का इतिहास उजागर किया जाए। इसके अलावा उन्होंने ईवीएम प्रणाली पर सवाल करते हुए चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की।
इसके अलावा बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क ने चेतावनी दिया कि अगर शीध्र ही सात बिन्दुओं पर कार्य नहीं किया गया तो संगठन पांच चरणों में चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में सुबाष चन्द्र बौद्ध, रामदवर, जयबहादुर मौर्य, अभिमन्यु प्रधान, विरेन्द्र प्रधान, दीपांकर कुमार, पंकज कुमार, रामविनय पटेल, राजकुमार शाक्य, रामविजय, एड मन्टू कुशवाहा एडवोकेट, विजय बहादुर यादव, बृजभूषण, रामनारायन, भगवती यादव, लालमन आदि मौजूद रहे।
सौंपे गये मांग पत्र में जिलाध्यक्ष त्रिभुवन बौद्ध ने बताया कि महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 को बौद्धों ने नहीं बनाया इसलिए महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 को रद करके इसकी जगह नया एक्ट बनाया जाए। जिसमे सभी सदस्य बौद्ध होने चाहिए। महाबोधि महाविहार यह बौद्धों की विश्व धरोहर है ऐसे में महाविहार परिसर में अन्य किसी भी धार्मिक स्थापना अनुचित है दीवार पर पांडवों का जिक्र करना अपमान है।
प्रदेश संयोजक सुबाष चन्द्र बोद्ध ने कहाकि महाबोधि महाविहार मूलत बौद्धों की विश्व धरोहर है ऐसे में इस स्थल को बौद्धों का सुपुर्द किया जाए। साथ ही महंत के कोठी के सैकड़ों बुद्ध की प्रतिमाए, शिलालेख और अभिलेख पड़े है, उसे एएसआई बोधगया संग्रहालय को सुर्पुद किया जाना चाहिए। इसके अलावा महाबोधि महाविहार के आस-पास के परिसर में विधर्मी बड़े पैमाने पर लाउड स्पीकर लगाने से माहौल खराब हो रहा है, जिसका संज्ञान लेना चाहिए। महाबोधि महाविहार के पास सम्राट अशोक का महल था, जिसे फ्रांसीस बुकानन ने देखा था उसे ढूंढकर बोधगया का इतिहास उजागर किया जाए। इसके अलावा उन्होंने ईवीएम प्रणाली पर सवाल करते हुए चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की।
इसके अलावा बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क ने चेतावनी दिया कि अगर शीध्र ही सात बिन्दुओं पर कार्य नहीं किया गया तो संगठन पांच चरणों में चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में सुबाष चन्द्र बौद्ध, रामदवर, जयबहादुर मौर्य, अभिमन्यु प्रधान, विरेन्द्र प्रधान, दीपांकर कुमार, पंकज कुमार, रामविनय पटेल, राजकुमार शाक्य, रामविजय, एड मन्टू कुशवाहा एडवोकेट, विजय बहादुर यादव, बृजभूषण, रामनारायन, भगवती यादव, लालमन आदि मौजूद रहे।
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