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पुस्तक व पर्यावरण मेला का फीता काटकर डीएम ने किया शुभारंभ

  एक लिखी हुई किताब जब तक अस्तित्व में रहती है, आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करती रहती है :  डीएम संवाददाता - बागी न्यूज 24   आजमगढ़। जिलाधिक...

 

एक लिखी हुई किताब जब तक अस्तित्व में रहती है, आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करती रहती है : डीएम

संवाददाता - बागी न्यूज 24  

आजमगढ़। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने हरिऔध कला केंद्र आजमगढ़ में सामाजिक वानिकी प्रभाग एवं जिला पर्यावरण समिति द्वारा आयोजित पुस्तक एवं पर्यावरण मेला-2026 का फीता काटकर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। आजमगढ़ पुस्तक एवं पर्यावरण मेला 02 फरवरी से 08 फरवरी 2026 तक हरिऔध कला केन्द्र आजमगढ़ में आयोजित रहेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि आज से शुरू होकर 8 फरवरी 2026 तक चलने वाले पर्यावरण एवं पुस्तक मेले का जनपद वासियों को काफी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि पुस्तक से होने वाले फायदे को सभी पढ़े लिखे लोग जानते हैं। उन्होंने कहा कि जब किताबे बोलतीं है, तो सदियां सुनतीं है, यह बात अक्षरशः सही है। उन्होने कहा कि टीवी, भाषण या नाटकों का प्रभाव कुछ समय (घंटों, दिनों या महीनों) तक रहता है, लेकिन एक लिखी हुई किताब जब तक अस्तित्व में रहती है, आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करती रहती है। जिलाधिकारी ने कहा कि यह जनपद के लोगो के लिए एवं जनपद के आस पास के लोगो के लिए बहुत ही बढ़ा सुनहरा अवसर है कि यहां पर एक से एक प्रकाशन व एक से एक राईटर तथा एक से एक सब्जेक्ट पर किताबें हैं।
जिलाधिकारी ने आज़मगढ़ की धरती से जुड़े महान साहित्यकारों जैसे राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘‘हरिऔध’’, रामधारी सिंह दिनकर और मुंशी प्रेमचंद का ज़िक्र किया, जिनकी कृतियाँ इस मेले में उपलब्ध हैं।
जिलाधिकारी ने स्कूल और कॉलेजों के प्रधानाचार्यों से अपील किया कि वे हाईस्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक के छात्रों को इस मेले में लाएं। उन्होने कहा कि यहां सिर्फ देखने का नहीं है, बल्कि यहां किताबें बिकती है। उन्होने कहा कि छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए किताबों पर न्यूनतम 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है, इसलिए जिसको जो अच्छा लगे वह किताब खरीद कर पढ़ सकते हैं। उन्होने कहा कि यह मेला न केवल ज्ञानवर्धन के लिए है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और जीवन में प्रेरणा पाने का भी एक बेहतरीन ज़रिया है। जिलाधिकारी ने कहा कि यहां पर्यावरण का मेला भी लगाया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि मेले के प्रवेश द्वार पर पुस्तक के आकार में बना पेड़ पर्यावरण और ज्ञान के अंतर्संबंध को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अभी जल्द ही तमसा नदी के पुनरोद्धार के लिए कार्य हुआ है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम है। जिलाधिकारी ने कहा कि 2025 में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया गया था और इस वर्ष (2026) जुलाई-अगस्त के दौरान लगभग 56 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। जिलाधिकारी ने इस आयोजन को सफल बनाने में वन विभाग, जिला प्रशासन और सामाजिक प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका की सराहना की गई। उन्होंने कहा कि इसका अधिक से अधिक लाभ लें, यहा भ्रमण कर देखें तथा अपनी मन पसन्द की किताबे देखें व खरिदे, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सके। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से संबंधित जितने भी व्यक्ति हैं, वे बहुत अच्छा कार्य कर रहे है तथा समाज एवं पर्यावरण के हित में है। जिलाधिकारी ने इस तरह के आयोजनों को पावन और सामाजिक कार्य बताते हुए भविष्य में भी इन्हें अधिक प्रभावी ढंग से आयोजित करने की कामना की। जिलाधिकारी ने बताया कि मेला दिनांक 02 फ़रवरी से 08 फ़रवरी तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन ज़िला प्रशासन के विभिन्न विभागों द्वारा जनजागरुकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्य विकास अधिकारी श्री परीक्षित खटाना, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री चिराग जैन, डीएफओ आकांक्षा जैन, मुख्य कोषाधिकारी श्री अनुराग श्रीवास्तव, सहित अन्य अतिथिगण द्वारा प्रतिभाग किया गया। अंतर्राष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर सामाजिक वानिकी प्रभाग आज़मगढ़ द्वारा जीयनपुर रेंज स्थिति ताल सलोना वेटलैंड पर विद्यार्थियों के साथ बर्ड वाचिंग आयोजित की गई। साथ ही बर्ड वाचिंग एवं वेटलैंड जैसे विषयों पर क्विज़ प्रतियोगिताएं, चित्रकला तथा भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गईं।







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