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छात्रों को साइबर ठगी से बचाव, 2FA व सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के दिए गए टिप्स

  छात्रों को साइबर ठगी से बचाव, 2FA व सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के दिए गए टिप्स 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की दी गई सलाह   ...

 


  • छात्रों को साइबर ठगी से बचाव, 2FA व सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के दिए गए टिप्स
  • 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की दी गई सलाह  
  • "डिजिटल सुरक्षा ही असली कवच”: एमएसडीयू में साइबर जागरूकता व्याख्यान आयोजित

सवाददाता - बागी न्यूज 24  

आज़मगढ़। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  डॉ. अनिल कुमार के आदेशानुसार जनपद में चलाए जा रहे साइबर जागरूकता अभियान के क्रम में तथा नोडल अधिकारी साइबर क्राइम श्री विवेक त्रिपाठी के निर्देशन में आज महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय (एमएसडीयू), आजमगढ़ में साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल जागरूकता विषयक एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री संजीव कुमार द्वारा डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को सतर्क एवं जागरूक रहने हेतु प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक के सुरक्षित उपयोग की जानकारी अत्यंत आवश्यक है तथा “सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच”है। मुख्य अतिथि प्रो. किशन कुमार गोयल ने साइबर सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA), संदिग्ध लिंक से बचाव एवं सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। साइबर सेल टीम, आजमगढ़ के उ0नि0 रवि गौतम, मुख्य आरक्षी ओमप्रकाश जायसवाल एवं राहुल सिंह द्वारा छात्र-छात्राओं को वास्तविक केस स्टडी के माध्यम से साइबर ठगी से बचाव के उपाय बताए गए। साथ ही यह भी अवगत कराया गया कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान युवाओं को “डिजिटल एंबेसडर” बनने हेतु प्रेरित किया गया, जिससे वे स्वयं जागरूक होकर अपने परिवार एवं समाज, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैला सकें। कार्यक्रम में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों एवं विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध हुआ, जिससे उनमें डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई।









  



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